Gujarat: 2002 में हुए गोधरा कांड का वो खौफनाक सच जिसे सुन कर लोग आज भी रोने लगते हैं! इस कांड में प्रधान मंत्री का कितना रोल था?

गोधरा कांड pic by google

गुजरात गोधरा कांड: लोग इस घटने का शुरुआत 27 फ़रवरी 2002 को मुस्लिमों द्वारा ट्रेन में आग लगने से ही करते हैं। लेकिन इसके पीछे का इतिहास कोई नही बताता की मुस्लिमो ने आग क्यों लगाई?

इस कहानी के पीछे का असली सच क्या था?

27 फ़रवरी के सुबह के समय भीड़ ने पेट्रोल डाल कर ट्रेन के डिब्बों में आग लगा दिया जिसमे 59 कारसेवको की मौत हो गई जो ट्रेन द्वारा अयोध्या से वापस आ रहे थे। ये वही कार सेवक थे जो अयोध्या में बाबरी मस्जिद को शहीद करने में हाथ था। कहां जाता है मस्जिद शहीद करने के बाद ये मुसलमानों को टॉर्चर कर रहे थे।

चुकी 18 सितंबर : नानावटी आयोग ने गोधरा कांड की जाँच सौंपी और कहा कि यह पूर्व नियोजित षड्‍यंत्र था और एस-6 कोच को भीड़ ने पेट्रोल डालकर जलाया। जिसमे कई समुदाय के लोग सामिल थे। 12 फ़रवरी 2009 उच्च न्यायालय ने पोटा समीक्षा समिति के इस फैसले की पुष्टि भी की थी।

दो समुदाय के बीच प्रदर्शन

एक मुस्लिम बुजुर्ग के आंखो देखा सच!

अब तक गोधरा कांड कांड पूरी तरह से हिंदू मुस्लिम का रूप ले चुका था। हर तरफ दहशत और लाशे नज़र आ रही थी, बजरंग दल हाथों में तलवारे, बंदूके, ईट, पत्थर, आग लेकर रोड पर निकल पड़ा था। जहां भी मुस्लिम घर नज़र आता वहा वो लोग घर में घुसकर मुस्लिमों के पूरे खानदान को ख़त्म कर देते और घर में आग लगा देते थे।

इसी बीच एक ऐसा घटना घटा की सुन कर आपके रूह कांप जायेगा। हिंदू बजरंग दल वाले एक बुजुर्ग मुस्लिम के घर में घुसते है जहां उसके बेटे बहुएं और बेटियां मौजूद थीं, फिर उन लोगो ने बुजुर्ग के सामने उसके बेटों को मारकर बहुएं और बेटियों का बलात्कार किया और फिर प्रेगनेट बहु का जिंदा रहते ही तलवार से पेट को चीरा और पेट से सात महीने के बच्चे को बाहर निकालकर बुजुर्ग के सामने ही बच्चे को तलवार से दो टुकड़ा कर देता हैं। फिर पूरे खानदान का कत्ल कर के अगले घर में दहशत मचाने पहुंच जाते हैं

लगभग 1000 से ज्यादा मुस्लिमों को जान से मारा गया।

दंगा इतना ज्यादा भड़क चुका था की प्रशासन के हाथ में काबू से बाहर था वहां के मुख्य मंत्री रहे नरेंद्र मोदी जी ने भी मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचार को नजरंदाज कर दिया था और कत्ल का सिलसिला महीनों चलता रहा और हजारों मुस्लिमो का कत्ल कर दिया गया। वहीं 250 हिंदुओं को भी अपनी जान गवानी पड़ी थी।

इतने बड़े दंगे की साजिश के पीछे नरेंद्र मोदी को जिम्मेदार ठराया गया।

महीनो बाद जब दंगा शांत हुआ और इंक्वायरी शुरू हुई तो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी संजय भट्ट ने गोधरा कांड के बाद हुए दंगों में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को शामिल बताया है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में यह बात कही है. एसआईटी पर सच छिपाने के आरोप लगाए.
भट्ट का कहना है कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट में इसलिए जाना पड़ा क्योंकि इस कांड की छानबीन के लिए बनी विशेष जांच टीम (एसआईटी) पर उन्हें भरोसा नहीं है. अपने हलफनामे में भट्ट ने जांच एजेंसियों पर गुजरात सरकार नरेंद्र मोदी को बचाने का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि इस मामले में मौजूद जानकारी पर काम नहीं किया जा रहा है. भट्ट का दावा है कि वह 27 फरवरी 2007 को मुख्यमंत्री निवास पर हुई बैठक में मौजूद थे जिनमें अब के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने अधिकारियों को इस मामले पर ज्यादा तवज्जो न देने को कहा। इससे ये साबित हो गया की गोधरा काण्ड के पीछे नरेंद्र मोदी जी का हाथ था.

इतना सबूत होने के वावजूद कोर्ट ने क्लीन चिट पर मुहर लगा दिया।

गुजरात दंगो में न सिर्फ़ मोदी जी का हाथ था बल्कि मोदी जी का पूरा सहमति था और 3 दिन तक मुस्लिमो के कत्ल करने का खुला छूट भी दिया था। आज तक के ऑपरेशन कलंक में इसका पूरा खुलासा हुआ था। फिर भी 25 जून को कोर्ट ने गोधरा कांड की सुनवाई करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट पर मुहर लगा दी।

आज तक के ऑपरेशन में मोदी जी को हिंसा का जिम्मेदार माना।